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नई दिल्ली 20 जून शुक्रवार 2025आज प्रातः काल बैठक में

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नई दिल्ली 20 जून शुक्रवार 2025आज प्रातः काल बैठक में

*विमान दुर्घटना के पीछे मूल कारण वामपंथी जज*
*विमान रखरखाव में तुर्की की कंपनी का फेवर करने वाले जज सोमशेखर सुंदरसन* 
नई दिल्ली 20 जून शुक्रवार 2025आज प्रातः काल बैठक में बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में बताया कि
जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा था, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह मांग उठी कि तुर्की की कंपनी सलेबी जो कि एयर इंडिया की मेंटेनेंस का काम करती है, इसे फौरन काम से हटाया जाए, उस वक्त तुर्की के सामानों के बहिष्कार का एक दौर भी चल रहा था, लेकिन तब यह मामला मुंबई हाई कोर्ट में गया और जज सोमशेखर ने तुर्की की कंपनी सेलेबी को क्लीन चिट देते हुए कहा कि वो एयर इंडिया के विमानों की मेंटेनेंस का काम जारी रखे ।

*आखिर कौन हैं सोमशेखर सुंदरसन ?*

कभी पत्रकार हुआ करते थे मिस्टर सुन्दरसन। इन्होंने पत्रकार बनने के बाद इन्होंने J.Sagar Associate नामक एक लॉ फर्म के लिए काम किया।

अपनी नियुक्ति से पहले तक सुंदरसन कॉर्पोरेट दिवाला और परिसमापन पर भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड की सलाहकार समिति में कार्यरत थे।  वह निरमा यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में बोर्ड ऑफ स्टडीज के सदस्य भी हैं।

अब बताइये....एक पत्रकार, प्राइवेट फर्मो में नौकरी करने वाले आदमी इस देश में सीधे हाई कोर्ट के जज बना दिये जाते हैं... और उनको पॉवर इतनी कि सीधे राष्ट्रपति से जवाब तलब करे, संसद के बनाए कानूनों को ठेंगा दिखाए। 
वाह रे #लोकतंत्र। वाह रे #संविधान। क्या यही कारण है बॉम्बे हाइकोर्ट से लगातार विवादित फैसले आ रहे है?
जब कॉलेजियम ने जज सोमशेखर की सिफारिश की थी तो केंद्र सरकार ने 2 साल तक आपत्तियां जताई और विरोध किया लेकिन आखिरकार कॉलेजियम के जिद के सामने सरकार मान गई जिसका खामियाजा 241 यात्रियों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा है

हैरानी क्या बात ये है कि वकील रहने के दौरान सोम शेखर अपनी वामपंथी सोच के लिए भी केख्यात रह चुके थे । सरकार सोमशेखर के वकील रहने के दौरान सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए भी उनका विरोध कर रही थी। सरकार की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और इसी तरह सोमशेखर को भी है। बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल ने बताया कि न्यायव्यवस्था पर मानसूत्र सत्र में दोनों सदनों में चर्चा हो सकती हैं। इसके लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच नई दिल्ली के राष्ट्रीय महामंत्री राहुल गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को पत्र दिया है। न्याय व्यवस्था में अमूल चूल बदलाव के लिए भारत की जनता ने अपनी आवाज प्रखर कर दी है। न्यायालय की मनमानी नहीं चलेगी। राष्ट्र हित के खिलाफ न्यायालय के आदेश को निरस्त करने का अधिकार राष्ट्रपति को है।

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